Friday, December 7, 2018

एडिलेड टेस्ट से दूर हो रहे दर्शक, परेशान CA ने BCCI से की ये अपील

भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में दर्शकों की कमी को देख क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) परेशान है. उसने बीसीसीआई से दिन-रात्रि टेस्ट के विरोध पर पुनर्विचार की अपील की है. सीए ने शुक्रवार कहा कि उन्हें अगले दौरे पर एडिलेड में दूधिया रोशनी में मैच खेलना चाहिए. ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों ने कहा कि टेस्ट के पहले दिन मैदान में 23,802 दर्शक पहुंचे, जो 2013 में इस मैदान के पुननिर्माण के बाद सबसे कम है. यह चिंता करने वाली बात है.

पर भारत का पलड़ा भारी, अश्विन-पेसरों ने की गजब की बॉलिंग

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केविन रॉबर्ट्स से जब पूछा गया कि क्या दर्शकों की कम संख्या ने उन्हें इस बात के लिए प्रेरित किया कि एडिलेड में टेस्ट क्रिकेट दिन-रात्रि में खेला जाए, तो उन्होंने कहा, ‘बिल्कुल, प्रशंसक क्या चाहते हैं यह काफी मायने रखता है और उनकी मौजूदगी यह बता भी रही है. पिछले वर्षों में यहां बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे.’

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुताबिक पिछले साल इस मैदान में एशेज के पहले मैच के लिए 55,000, उससे पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के लिए 32,255 और न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट के पहले दिन मैदान में 47,441 दर्शक मौजूद थे.

गुरुवार को दर्शकों की यह संख्या चार साल पहले भारत के खिलाफ यहां खेले गए मैच के पहले दिन से भी कम थी. उस मैच में 25,619 दर्शक मैदान में मौजूद थे. उन्होंने एसईएन रेडियो से कहा, ‘इस में कोई शक नहीं कि दिन-रात्रि टेस्ट के प्रशंसक हमसे दूर हुए हैं. हम एडिलेड में फिर से दिन-रात्रि टेस्ट मैच की तरफ लौटना चाहेंगे.’

पुजारा ने दिखाया द्रविड़ वाला दम, हैरान कर देगा ये रिकॉर्ड

रॉबर्टस ने कहा उन्हें उम्मीद है कि बीसीसीआई 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया के अगले दौरे पर दिन-रात्रि टेस्ट खेलने के लिए तैयार होगा. उन्होंने कहा, ‘हम ऐसा ही उम्मीद कर रहे. हम एक बार में एक कदम लेंगे. हम यह मानते हैं कि टेस्ट को लेकर उनका नजरिया अलग है. उम्मीद है कि प्रशंसकों की भावनाओं को ध्यान में रखकर हम दिन-रात्रि टेस्ट में खेल सकते है.’

Thursday, December 6, 2018

गाय के नाम पर हुई हत्याओं में कैसी ढी

सितंबर 2015 में भीड़ के हाथों मोहम्मद अख़लाक की हत्या से लेकर अब तक भारत में मॉब लिंचिंग के मामलों में 80 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. इनमें से हत्या के 30 से ज़्यादा मामलों में सीधे तौर पर स्वघोषित गौ-रक्षकों की भूमिका है.

‘मॉब लिंचिंग’ के ज़्यादातर मामलों में घटना के वक्त सैकड़ों लोग मौक़ा-ए-वारदात पर मौजूद थे. लोगों ने पीट-पीट कर मारे जाने के वीडियो अपने मोबाइल फ़ोन पर बनाए और तस्वीरें भी खींचीं. इंटरनेट पर सनसनी की तरह फैलाने वाले इन वीडियो और तस्वीरों को बाद में सोशल मीडिया और समचार चैनलों के ज़रिए सारी दुनिया ने देखा.

लेकिन इतने गवाहों और रिकॉर्डेड दस्तावेज़ों के बावजूद मॉब लिंचिंग से जुड़े मामले अदालतों में ‘ब्लाइंड मर्डर’ में तब्दील होते नज़र आ रहे हैं.

देश की अदालतों में लड़खड़ा रही ‘मॉब लिंचिंग’ की सुनवाइयों की मौजूदा हालत जानने के लिए बीबीसी ने मोहम्मद अख़लाक से शुरू करते हुए पहलू खान, हाफ़िज़ जुनैद और फिर रकबर तक, चार मामलों में जारी आदलती कार्रवाई पर ग़ौर किया. इस पड़ताल के दौरान बीबीसी ने चार्जशीट समेत चारों मामलों में जारी अदालती सुनवाई से जुड़े विभिन्न क़ानूनी दस्तावेज़ों को पढ़ने के साथ साथ वकीलों, चश्मदीद गवाहों और परिजनों से बात की है.

इन चार मामलों में कुछ बातें मोटे तौर पर एक जैसी हैं--ज़्यादातर अभियुक्तों की ज़मानत पर रिहाई, अभियुक्तों की शिनाख़्त करने वाले कई चश्मदीद गवाहों को पुलिस पड़ताल में शामिल ही न करना, परिजनों और चश्मदीद गवाहों के बयानों के आधार पर अभियुक्तों पर उचित धाराएं न लगाना, सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद मॉब लिंचिंग में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले पुलिसवालों पर कार्रवाई न करना और अभियुक्तों की मदद की नीयत से चार्जशीट को कमज़ोर करना.

रकबर की पत्नी अस्मीना ने पहले आंगन में बंधे दुधारू पशुओं के सानी-पानी का मुआयना किया और फिर मेरे पास बैठते हुए बोली, “गाय-भैसों से तो घर चले है मेरा, इन्हीं का दूध बेचकर हमने 7 बच्चों का अपना परिवार पाला. गायों को तो मैं माँ मानूं जी अपनी. और मुझसे ज़्यादा तो रकबर मानता था इनको. लेकिन आज जैसे पशुओं की जान सबको प्यारी है, और इंसानों की? इंसानों की जान की कोई क़ीमत नहीं है क्या?”

मेरे पास अस्मीना के सवाल का कोई जवाब नहीं था. गायों को प्यार करने वाले रकबर को भीड़ ने ‘गो-तस्कर’ घोषित करके मौत के घाट उतार दिया.

Tuesday, December 4, 2018

इंस्पेक्टर के ड्राइवर ने कहा- साहब को बचाने की पूरी कोशिश की, खुद के लिए भागना पड़ा

बुलंदशहर के सयाना में गोकशी के शक में भड़की हिंसा के दौरान सोमवार को इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या कर दी गई। हिंसा के वक्त उनके साथ मौजूद ड्राइवर रामाश्रय के मुताबिक, उन्होंंने अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से घायल इंस्पेक्टर को बचाने की काफी कोशिश की। लेकिन तभी भीड़ ने दोबारा हमला कर दिया। जान बचाने के लिए उन्हें और उनके सिपाही साथियों को भागना पड़ा।

मारो-मारो, पकड़ो-पकड़ो बस यही आ रही थी आवाज'
रामाश्रय ने बताया- घायल इंस्पेक्टर सुबोध बाउंड्रीवाल के पास पड़े थे। उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए सिपाही वीरेंद्र सिंह और दरोगा सुभाष के सहयोग से गाड़ी में रखा। लेकिन तभी भीड़ ने फिर पथराव शुरू कर दिया। हम जान बचाकर भागे। उस वक्त इंस्पेक्टर सुबोध घायल थे, उनकी सांस चल रही थी। बाद में इंस्पेक्टर की हत्या कर दी गई। भीड़ से मारो-मारो, पकड़ो-पकड़ो यही अवाजें आ रही थीं।

बेटे ने कहा- हिंदू-मुस्लिम विवाद में मेरे पिता की जान गई

इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के बेटे अभिषेक ने कहा कि पिता ने मुझे हमेशा अच्छा इंसान बनने की सलाह दी। उन्होंने मुझे हमेशा धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा से दूर रहने को कहा। लेकिन आज हिंदू-मुस्लिम विवाद में मेरे पिता की जान गई, कल किसी और के पिता को मार दिया जाएगा।

500 लोगों ने किया हमला

हिंसा के दौरान मौके पर मौजूद उप निरीक्षक सुरेश कुमार ने दावा किया कि लगभग 300 से 500 लोगों ने पूरे पुलिस बल पर हमला किया था। बुलंदशहर के डीएम अनुज झा ने बताया कि इंस्पेक्टर सुबोध की मौत गोली लगने से हुई।

दो एफआईआर दर्ज, 27 नामजद

पुलिस ने मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर स्लॉटर हाउस पर और दूसरी हिंसा को लेकर दर्ज हुई है। एफआईआर में 27 नामजद और 60 अज्ञात आरोपी हैं। इनमें बजरंग दल का नेता योगेश राज, भाजपा युवा अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, विहिप कार्यकर्ता उपेंद्र राघव भी नामजद है।

疫情延烧 美国参议院再通过约5000亿美元经济援助计划

  中新网4月22日电 据外媒报道, 香港自去年 色情性&肛交集合 爆发“反送中 色情性&肛交集合 ”抗议后政府首次有问责官员 色情性&肛交集合 人事调动,政制及内地事务局局 色情性&肛交集合 长聂德权被平调 色情性&肛交集合 接替罗智光出任 色情性&肛交集合 公务员事务局局长...