cकारोबार करने की सहूलियत यानी 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस' के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग में बड़ा सुधार हुआ है.
विश्व बैंक ने साल 2019 के लिए 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस' का सर्वे जारी किया है जिसमें भारत 23 पायदान चढ़कर 77वें नंबर पर आ गया है.
इस सर्वे में 190 देशों को शामिल किया गया था.
पिछले साल भी भारत का प्रदर्शन सकारात्मक रहा था और यह 30 पायदान चढ़कर 100वें नंबर पर आया था.
विश्व बैंक ने अपने सर्वे में कहा है कि भारत ने कई आर्थिक मोर्चों पर सुधार किया है. मसलन निर्माण के क्षेत्र में भारत की रैंकिंग अविश्वसनीय रूप से सुधरी है और यह पिछले साल की 181वीं रैंकिंग से उछलकर 52वें नंबर पर आ गया है.
विश्व बैंक ने ये भी कहा कि भारत ने अपने टैक्स सिस्टम में सुधार किया है और बैंकों से कर्ज़ लेने की प्रक्रिया आसान की है. कर्ज़ लेने के मामले में भारत 29वें से 22वें नंबर पर आ गया है. सर्वे में जीएसटी का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि इससे टैक्स का भुगतान और अलग-अलग हिस्सों में कारोबार करना आसान हुआ है. कारोबार शुरू करने के मामले में भारत पिछले साल के मुकाबले 156 से 137वें नंबर पर आ गया है.
बिजली का कनेक्शन लेना सस्ता और आसान हुआ है. बिजली के मामले में भारत की रैंकिंग सुधरकर 29वें से 24वें नंबर पर आ गई है.
भारत ने सीमा पार यानी दूसरे देशों में कारोबार और व्यापार में भी सुधार किया है. विदेश व्यापार के लिहाज़ से भारत 180 से 46वें नंबर पर आ गया है.
इस मामले में भारत पिछले साल 140वें नंबर पर था और अब 80वें नंबर पर आ गया है. सर्वे में भारत के 'नेशनल ट्रेड फ़ेसिलिटेशन ऐक्शन प्लान 2017-2020' का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि देश में आयात-निर्यात में लगने वाले वक़्त और होने वाली परेशानियों को काफ़ी हद तक कम किया गया है.
आर्थिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा बताते हैं कि किसी भी देश में अगर निवेश की बात होती है तो उसके लिए कई पैमानों को देखा जाता है.
इनमें से एक है 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस' या कारोबारी सुगमता का पैमाना. कारोबारी सुगमता यानी ये जानना कि किसी देश में कारोबार शुरू करना कितना आसान या मुश्किल है.
मसलन, कारोबार शुरू करने में कितना समय लगता है, कोई बिल्डिंग बनानी है तो उसकी इजाज़त लेने में कितना वक़्त लगता है, बिजली का कनेक्शन लेना कितना आसान है...वगैरह-वगैरह.
आर्थिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा कहते हैं कि कोई भी विदेशी निवेशक अगर किसी दूसरे देश में निवेश के बारे में सोचता है तो वो सबसे पहले यही देखता है कि वहां कारोबार करना आसान है या नहीं.
ऐसे में अगर भारत के पास ऐसी रैंकिंग है जिसे ख़ुद विश्व बैंकिंग ने तैयार की है तो निवेशक को एक भरोसा मिलेगा कि यहां कारोबार करने का फ़ैसला सही होगा.
अगर एफ़डीआई की बात करें तो पिछले कुछ सालों में भारत के प्रदर्शन में सुधार हुआ है. रैंकिंग सुधरने के बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और बढ़ने की उम्मीद ज़रूर है. हालांकि ऐसा होगा ही, ऐसा पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता.
निवेश के अलावा फ़ायदों की बात करें तो ऐसी रिपोर्टें हमें ख़ुद को परखने का मौका देती हैं कि हम कहां मज़बूत स्थिति में हैं और कहां सुधार की गुंजाइश है.
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